ड्रग इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह राणा की अगुवाई में FDA की बड़ी कार्रवाई, कोडीन माफिया पर कसा शिकंजा
देहरादून। उत्तराखंड में नशे के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक बार फिर बड़ा और निर्णायक एक्शन लिया है। ड्रग इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह राणा की अगुवाई में देहरादून जिले में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री और वितरण में लिप्त नेटवर्क पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई, जिससे नशे के सौदागरों में हड़कंप मच गया है।

यह कार्रवाई अपर आयुक्त, FDA उत्तराखंड के निर्देशों तथा उप आयुक्त FDA द्वारा गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) के नेतृत्व में बीते एक सप्ताह के भीतर अंजाम दी गई। FDA की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी कर अवैध कारोबार की जड़ों पर सीधा वार किया।
दो फर्म सील, लाइसेंस निरस्तीकरण की सिफारिश
QRT टीम ने जांच के दौरान दो फर्मों के क्रय-विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए उन्हें मौके पर ही सील कर दिया। इन फर्मों के खिलाफ विवेचना प्रचलित की गई है और लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।

इसके अलावा एक अन्य फर्म के लाइसेंस को भी निरस्त करने की सिफारिश की गई है। FDA की इस सख्त कार्रवाई से अवैध दवा कारोबार से जुड़े लोगों में भारी खलबली मची हुई है।
18 संदिग्ध दवाओं के नमूने, गुणवत्ता जांच शुरू
छापेमारी के दौरान कुल 18 संदिग्ध औषधियों के नमूने एकत्र किए गए, जिन्हें गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।

FDA अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि जांच में दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरतीं या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित फर्मों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अधिक कठोर की जाएगी।
FDA का स्पष्ट संदेश है—
“उत्तराखंड में नकली, घटिया और नियमों के खिलाफ दवाओं के लिए कोई जगह नहीं है।”
पुलिस–FDA की संयुक्त कार्रवाई
ड्रग इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह राणा के समन्वय में पुलिस विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण अभियान भी चलाया गया। इस दौरान न केवल मेडिकल स्टोरों बल्कि औषधि निर्माता इकाइयों से भी नमूने लिए गए और स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, बिल व अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की गई।

संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य साफ था — नशे की पूरी सप्लाई चेन को चिन्हित कर उसे जड़ से खत्म करना।
थोक विक्रेताओं पर भी कड़ा प्रहार
FDA ने नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए 02 थोक विक्रेता फर्मों के वितरण पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है।
यह कदम दर्शाता है कि विभाग की कार्रवाई सिर्फ फुटकर दुकानदारों तक सीमित नहीं, बल्कि थोक सप्लायर और मैन्युफैक्चरिंग चैन तक फैली हुई है।
निर्माण इकाइयों की सघन जांच
कोडीन युक्त कफ सिरप के निर्माण और आपूर्ति से जुड़े मामलों में 02 निर्माण इकाइयों का सघन निरीक्षण किया गया।
इन इकाइयों के खिलाफ विवेचना प्रचलित करते हुए सभी जरूरी दस्तावेज मुख्यालय को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिए गए हैं। अब आगे की कार्रवाई मुख्यालय स्तर से की जाएगी।
ड्रग इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह राणा: ज़ीरो टॉलरेंस की मिसाल
ड्रग इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह राणा नशे, नकली दवाओं और अवैध फार्मा कारोबार के खिलाफ सख्त, ईमानदार और निष्पक्ष कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं—
- ग्राउंड लेवल पर लगातार निगरानी
- पुलिस व अन्य एजेंसियों के साथ मजबूत तालमेल
- कानून का सख्त लेकिन निष्पक्ष पालन
- युवाओं और जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता

उनकी अगुवाई में FDA की QRT टीमें तेजी से कार्रवाई कर अपराधियों पर बिना देरी शिकंजा कस रही हैं।
FDA का दो टूक संदेश
FDA अधिकारियों ने साफ कहा है कि—
“कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। जो भी व्यक्ति या फर्म दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
नशे के खिलाफ निर्णायक जंग
यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और समाज को सुरक्षित रखने की ठोस पहल है।
मानवेन्द्र सिंह राणा जैसे अधिकारियों की सक्रियता और सख्ती के चलते उत्तराखंड में ड्रग माफिया की पकड़ लगातार कमजोर होती जा रही है।



