जनवरी में दवा बाज़ार में हड़कंप! कैल्शियम से लेकर BP तक की 10 दवाएं फेल, मरीजों की सेहत पर बड़ा खतरा
जयपुर। आम मरीजों की ज़िंदगी से जुड़ा एक गंभीर और चिंताजनक अलर्ट सामने आया है। जनवरी के पहले पखवाड़े में की गई जांच में कैल्शियम, बुखार, खांसी-दमा, दर्द और ब्लड प्रेशर जैसी रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली 10 दवाएं मानकों पर फेल पाई गई हैं। औषधि नियंत्रण आयुक्तालय की इस रिपोर्ट ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर कर रख दिया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि इन दवाओं में तय मात्रा में सक्रिय घटक (Active Ingredient) मौजूद ही नहीं थे। यानी मरीज जिस दवा को इलाज समझकर खा रहा है, वह इलाज नहीं बल्कि सीधा धोखा साबित हो सकती है।
इलाज नहीं, बीमारी को और बिगाड़ सकती हैं ये दवाएं
रिपोर्ट के मुताबिक सभी फेल दवाओं को नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) श्रेणी में रखा गया है, जिसे स्वास्थ्य के लिहाज़ से अत्यंत गंभीर माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दवाएं—
- बीमारी ठीक करने में पूरी तरह नाकाम रहती हैं
- मरीज की हालत को और ज्यादा बिगाड़ सकती हैं
- गंभीर मामलों में जान तक के लिए खतरा बन सकती हैं
हर घर में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी लिस्ट में
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि फेल हुई दवाओं में वही दवाएं शामिल हैं जो लगभग हर घर की दवा-पेटी में मिल जाती हैं, जैसे—
- कैल्शियम व विटामिन-D (हड्डियों की मजबूती के लिए)
- पैरासिटामोल (बुखार और दर्द)
- खांसी-दमा-ब्रोंकाइटिस की सिरप
- दर्द व सूजन की दवाएं
- ब्लड प्रेशर की गोलियां
कई सैंपल में विटामिन D3, जिंक, एसेक्लोफेनाक, एंब्रोक्सोल और टरब्यूटालीन जैसे जरूरी घटक तय मात्रा से काफी कम पाए गए।
तत्काल उपयोग बंद, बाजार से रिकॉल के आदेश
औषधि नियंत्रण विभाग ने साफ निर्देश जारी किए हैं—
- इन दवाओं का तत्काल उपयोग बंद किया जाए
- मेडिकल स्टोर और सप्लाई चेन से पूरा स्टॉक वापस मंगाया जाए
- संबंधित कंपनियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए
इस पूरे मामले के बाद सरकारी और निजी—दोनों सेक्टर की दवा सप्लाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फेल पाई गई दवाओं की सूची (बैच नंबर सहित)
- कैल्शियम + विटामिन-D – जेपीईई ड्रग्स, हरिद्वार (JDL3549)
- पैरासिटामोल टैबलेट (एक्स-पार 650) – डिजिटल विजन, हिमाचल (GTF 0653)
- ब्रॉन्को सुपर-A सिरप – ध्वनि लाइफ केयर, अहमदाबाद (DLS 3877)
- श्रीगा पैन-SP टैबलेट – मयाशा लाइफसाइंसेज (MDT-4458)
- एमएन-10 इंजेक्शन – जनया बायोकेयर, रुड़की (JIN 25-028)
- वोनकाल टैबलेट – लाइफविजन हेल्थकेयर, बद्दी (LTA-47700)
- TUS सिरप – मार्वेलॉन फार्मा (MDL-B458)
- एंब्रोक्सोल संयोजन – सिपको लिमिटेड, एमपी (AT18S125)
- एम्लोडिपिन-एटेनोलोल टैबलेट – सेंचुरियन रेमेडीज, वडोदरा (TH130010)
- खांसी की सिरप – सिपको लाइन, एमपी (AT22A225)
सबसे बड़ा सवाल: मरीज सही दवा कैसे पहचानें?
इस पूरे मामले ने दवा की गुणवत्ता, सरकारी निगरानी और मरीजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों की सलाह—
- बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें
- किसी भी संदिग्ध दवा की तुरंत शिकायत करें
- दवा खरीदते समय बैच नंबर, एक्सपायरी और कंपनी का नाम ज़रूर जांचें
यह मामला सिर्फ दवाओं की फेल लिस्ट नहीं, बल्कि लाखों मरीजों की सेहत और भरोसे का सवाल है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार कंपनियों पर कार्रवाई कितनी तेज़, कितनी सख़्त और कितनी प्रभावी होती है।



