बिना Polution NOC चल रहे उद्योग, हरिद्वार में प्रदूषण नियमों की अनदेखी उजागर
हरिद्वार। सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में ज़मीनी हकीकत कागज़ों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। फैक्ट्रियों की मशीनें चल रही हैं, चिमनियों से धुआँ उठ रहा है और मज़दूर रोज़ की तरह काम पर हैं, जबकि कई इकाइयाँ ऐसी हैं जिनकी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति या तो रिफ्यूज हो चुकी है या ली ही नहीं गई है।
इसी क्रम में Super-Tech System India का मामला सामने आया है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) ने कंपनी की Consolidated Consent to Operate (CCA) अर्जी खारिज कर दी है। बोर्ड के आदेश के अनुसार, यूनिट बिना वैध अनुमति के उत्पादन कर रही थी और ऐसे उत्पाद बना रही थी, जो उसके Consent to Establish (CTE) में शामिल नहीं थे।
मौके की स्थिति कुछ और ही कहानी कहती है
ग्राउंड पर हालात यह हैं कि—
- फैक्ट्री परिसर में रोज़ की तरह काम चलता रहा
- मशीनों के बंद होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखे
- आसपास के लोग साफ कहते हैं— “फैक्ट्री तो पहले से चल रही है”
यानी कागज़ों में कार्रवाई, लेकिन ज़मीन पर हालात जस के तस।
सिर्फ एक मामला नहीं
ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी सामने आ रहा है कि हरिद्वार जिले में कई ऐसे उद्योग हैं, जिनकी CTE या CTO/CCA अर्जियां पहले ही रिफ्यूज हो चुकी हैं, फिर भी उनका संचालन लगातार जारी है। नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन तरीका लगभग एक जैसा है।
नियम और हकीकत के बीच फर्क
नियमों के मुताबिक, बिना वैध अनुमति उद्योग चलाने पर तुरंत बंदी, बिजली-पानी की कटौती और कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन ज़मीनी स्तर पर ऐसी सख्ती कम ही देखने को मिलती है।
अब निगाहें प्रशासन पर
अब सवाल सीधे प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हैं—
- क्या अवैध रूप से चल रहे उद्योगों पर मौके पर जाकर कार्रवाई होगी?
- क्या वास्तव में ताले लगेंगे, या कार्रवाई फाइलों तक सीमित रह जाएगी?
ग्राउंड पर लोग यही इंतज़ार कर रहे हैं कि कानून कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर कब लागू होगा।



