मरीजों की जान से खिलवाड़? नकली दवाओं के शक में उत्तरांचल फार्मास्यूटिकल्स फैक्ट्री सील

मरीजों की जान से खिलवाड़? नकली दवाओं के शक में उत्तरांचल फार्मास्यूटिकल्स फैक्ट्री सील


नकली दवाओं का शक, GMP फेल: उत्तरांचल फार्मास्यूटिकल्स पर गिरी गाज

उत्तरांचल फार्मास्यूटिकल्स सील, लेकिन सवाल कई…

हरिद्वार।  औषधि विभाग द्वारा हरिद्वार जिले के रूड़की मे Utttanchal Pharmaceutical Pvt. Ltd. को सील किया जाना सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की दवा निर्माण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है। नकली दवाओं की लिखित शिकायत पर हुई इस कार्रवाई ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आख़िर इतने समय तक GMP और संशोधित शेड्यूल- का उल्लंघन कैसे चलता रहा?

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शिकायत से छापे तक की पूरी कहानी

सूत्रों के अनुसार, औषधि विभाग को इस फैक्ट्री को लेकर लंबे समय से गुणवत्ता से जुड़ी अंदरूनी शिकायतें मिल रही थीं।
13 जनवरी 2026  को सहायक औषधि नियंत्रक डॉ. सुधीर कुमार, औषधि निरीक्षक हरिश सिंह एवं निशा रावत की संयुक्त टीम ने जब औचक निरीक्षण किया, तो हालात चौंकाने वाले निकले।

जांच में सामने आया कि

  • उत्पादन क्षेत्र GMP मानकों के अनुरूप नहीं था
  •  Schedule-M के तहत अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा था
  • गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, रिकॉर्ड-कीपिंग और स्टोरेज में गंभीर खामियां मौजूद थीं

जांच के दौरान संदिग्ध औषधि उत्पादों को फॉर्म-16 में सील किया गया और मौके पर ही स्पॉट मेमो तैयार किया गया।


सीलिंग: अचानक कार्रवाई या मजबूरी?

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार द्वारा फैक्ट्री तत्काल प्रभाव से सील कर दी गई। यह कदम इस ओर इशारा करता है कि मामला केवल तकनीकी खामी का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर खतरे का माना गया।

विशेषज्ञों के अनुसार,
👉 जब बिना पूर्व चेतावनी सीधे सीलिंग होती है, तो उल्लंघन “Major या Critical Category” में आता है।


सबसे बड़ा सवाल: पहले कैसे चलता रहा उत्पादन?

यह कार्रवाई कई असहज सवाल खड़े करती है—

  • क्या इससे पहले इस फैक्ट्री का GMP ऑडिट हुआ था?
  • यदि हुआ, तो कमियां क्यों नहीं पकड़ी गईं?
  • क्या निरीक्षण वर्षों से कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह गया था?
  • Revised Schedule-M लागू होने के बाद कितनी फैक्ट्रियों का वास्तविक, ग्राउंड-लेवल निरीक्षण हुआ?

यदि यह इकाई लंबे समय से नियमों का उल्लंघन कर रही थी, तो निगरानी तंत्र की जवाबदेही किसकी है?


FDA का खुलासा: 289 कंपनियां, आधी अब भी जांच के दायरे में

इस पूरे मामले पर FDA के अपर आयुक्त तजवर सिंह ने अहम जानकारी साझा की है। उनके अनुसार—

  • उत्तराखंड में कुल 289 फार्मा कंपनियां पंजीकृत हैं
  • अब तक CDSCO और राज्य ड्रग विभाग द्वारा लगभग 150 कंपनियों की RBI (Risk Based Inspection) की जा चुकी है
  • शेष कंपनियों की जांच के लिए CDSCO और राज्य ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीमें लगातार RBI कर रही हैं

RBI की सख्ती का असर अब साफ दिखाई देने लगा है—

  • 10 से अधिक कंपनियों ने स्वयं ही उत्पादन बंद कर दिया है
  • कई अन्य इकाइयों को ड्रग विभाग द्वारा “स्टॉप प्रोडक्शन” नोटिस जारी किए गए हैं

GMP पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा

FDA अपर आयुक्त तजवर सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा—

“मानकों के उल्लंघन को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम तोड़ने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी। GMP का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है।”

उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि उत्तरांचल फार्मास्यूटिकल्स पर हुई कार्रवाई किसी एक मामले तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में चल रही सख्ती का हिस्सा है।


लैब रिपोर्ट बनेगी निर्णायक

फिलहाल जब्त दवाओं के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं। यदि रिपोर्ट में दवाएं—

  • नकली,
  • घटिया,
  • या मानकों से बाहर

पाई जाती हैं, तो कंपनी पर—

  • ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 18 और 27 के तहत आपराधिक मुकदमा
  • मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द
  • कंपनी डायरेक्टर्स पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय

की कार्रवाई तय मानी जा रही है।


जनस्वास्थ्य बनाम मुनाफा

नकली या घटिया दवाएं केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नियमित, पारदर्शी और निष्पक्ष निरीक्षण नहीं होगा, तब तक ऐसी इकाइयां सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाती रहेंगी।

उत्तरांचल फार्मास्यूटिकल्स पर हुई कार्रवाई एक स्पष्ट चेतावनी है—
फार्मा सेक्टर में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लेकिन असली परीक्षा तब होगी, जब यह देखा जाएगा कि
क्या RBI और GMP की सख्ती हर कंपनी तक पहुंचेगी, या कुछ मामलों तक सीमित रह जाएगी?


 

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