हरिद्वार से बड़ी खबर: शराब दुकानों पर फूड सेफ्टी विभाग की सख्ती, पहली बार निरीक्षण में उजागर हुई बड़ी लापरवाहियां

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हरिद्वार,  हरिद्वार जिले में शराब की दुकानों पर लंबे समय से नियमों की अनदेखी हो रही थी। अब आखिरकार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग हरकत में आया और जिले की कुछ शराब दुकानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामने आया कि शराब दुकानों पर न केवल फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 (FSSAI) की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सरकारी राजस्व दोनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

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किन दुकानों का हुआ निरीक्षण

विभागीय टीम ने सलेमपुर तिराहा सिडकुल, रोशनाबाद, हरिद्वार-रुड़की हाईवे और नेशनल हाईवे भगवानपुर पर स्थित चार अंग्रेजी शराब की दुकानों का औचक निरीक्षण किया। हालांकि विभाग की कार्रवाई फिलहाल केवल चार दुकानों तक सीमित रही है, लेकिन हरिद्वार जनपद में कुल 130 शराब की दुकानें बिना फूड लाइसेंस के संचालित हो रही हैं।

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निरीक्षण में मिली गंभीर अनियमितताएं

निरीक्षण में कई खामियां उजागर हुईं—

1. फूड लाइसेंस का अभाव – खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत शराब की दुकान संचालित करने के लिए फूड लाइसेंस अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान किसी भी दुकान के पास ऐसा लाइसेंस मौजूद नहीं था।

2. पेस्ट कंट्रोल व वर्करों के मेडिकल नहीं – दुकानों में न तो पेस्ट कंट्रोल का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध था और न ही काम करने वाले कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र।

3. रिकॉल प्लान और FIFO रजिस्टर का अभाव – नियमों के मुताबिक शराब दुकानों में First-In First-Out रजिस्टर और रिकॉल प्लान होना चाहिए, लेकिन कहीं भी यह उपलब्ध नहीं था।

4. खतरनाक स्टोरेज सिस्टम – शराब की पेटियां सीधे जमीन पर रखी मिलीं, जो स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों मानकों के खिलाफ है।

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विभाग ने जारी किए नोटिस

निरीक्षण में खामियां पाए जाने पर विभाग ने सभी चार दुकानदारों को नोटिस जारी किए हैं। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द फूड लाइसेंस के लिए आवेदन करें और पाई गई अनियमितताओं का जवाब दें। अगर निर्धारित समयसीमा में नियमों का पालन नहीं किया गया तो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

130 दुकानों पर कार्रवाई कब?

हालांकि यह कार्रवाई केवल 4 दुकानों तक सीमित है, लेकिन हकीकत यह है कि पूरे हरिद्वार जिले में 130 शराब की दुकानें बिना फूड लाइसेंस चल रही हैं। यह न केवल खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन है बल्कि सरकार को हर साल लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शराब भी खाद्य श्रेणी में आती है, इसलिए इस पर वही मानक लागू होते हैं जो अन्य खाद्य व पेय पदार्थों पर होते हैं। इसके बावजूद आज तक विभाग ने शराब की दुकानों पर न तो लाइसेंस जारी किए और न ही कभी सैंपलिंग की। यह सीधा-सीधा विभाग की लापरवाही को उजागर करता है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा पर बड़ा खतरा

बिना पेस्ट कंट्रोल, मेडिकल फिटनेस और सुरक्षित स्टोरेज के शराब की बिक्री उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रही है। गंदगी या संक्रमण के बीच रखी गई पेटियां और अनियंत्रित स्टॉकिंग शराब की गुणवत्ता पर गंभीर असर डाल सकती हैं।

लोगों के सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर शराब की दुकानें बिना फूड लाइसेंस कैसे संचालित हो रही थीं। लोगों का आरोप है कि विभाग ने अब तक केवल कागजी कार्रवाई की और सख्त कदम नहीं उठाए, जिसके चलते दुकानदार नियमों की अनदेखी करते रहे।

विभाग की अगली चुनौती

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग बाकी 130 दुकानों पर भी इसी तरह का निरीक्षण और सैंपलिंग करेगा, या यह कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी। अगर विभाग ईमानदारी से आगे बढ़ता है तो न केवल राजस्व में सुधार होगा बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई पहली पहल के रूप में जरूर स्वागत योग्य है, लेकिन अब जरूरी है कि पूरे जिले की सभी दुकानों पर सख्त कदम उठाए जाएं।

अगर विभाग ने इस मामले में कड़ाई दिखाई तो आने वाले समय में शराब कारोबारियों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा, अन्यथा यह कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।

 

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