हरिद्वार में पर्यावरणीय नियमों का पालन ना करने वाले उद्योगों पर बड़ी कार्रवाई — 20 और संस्थानों की NOC निरस्त
हरिद्वार, जनपद हरिद्वार में औद्योगिक इकाइयों द्वारा पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UEPPCB) ने कंसेंट मैनेजमेंट सिस्टम (OCMS) पर 20 ओर उद्योगों की ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ (NOC) रद्द कर दिये हैं
इनमें पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, मेटल वर्क्स, स्टोन क्रशिंग, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर से जुड़े उद्योग शामिल हैं। रद्द की गई NOC में ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ (CTE) और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (CTO) दोनों प्रकार की अनुमतियां हैं।
लेकिन यह तो सिर्फ हालिया कार्रवाई है — पिछले तीन महीनों में बोर्ड ने कुल 235 उद्योगों की NOC निरस्त की है।
NOC क्यों होती है जरूरी?
किसी भी उद्योग को शुरू करने और चलाने से पहले बोर्ड से पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य है। इसके दो चरण हैं —
1. Consent to Establish (CTE) — उद्योग लगाने से पहले।
2. Consent to Operate (CTO) — उद्योग चालू रखने के लिए, जिसे समय-समय पर नवीनीकरण करना होता है।
ये अनुमतियां इस शर्त पर दी जाती हैं कि उद्योग वायु और जल प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक उपकरण और प्रक्रियाओं का पालन करेगा।
हाल में रद्द हुए 20 उद्योगों की सूची में शामिल प्रमुख नाम
सचिन एंटरप्राइजेज — CTE (नई इकाई)
एम/एस एस.वी.जी. टेक — CTE (नई इकाई)
ए.एस. प्रिंट पैक — CTO (नवीनीकरण)
अमन मेटल्स कंपनी — CTO (नई इकाई)
विविमेड लैब्स लिमिटेड — CTO (नवीनीकरण)
कमल स्टोन क्रशर — CTO (नवीनीकरण)
नपिनो ऑटो — CTO (नवीनीकरण)
इनके अलावा भी कई उद्योग शामिल हैं, जो अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं।
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पिछले तीन महीनों में 235 NOC रद्द — लेकिन सवाल वही
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मई से अगस्त 2025 के बीच हरिद्वार जिले में 235 औद्योगिक इकाइयों की NOC रद्द की गई। कारणों में शामिल हैं:
प्रदूषण नियंत्रण उपकरण न लगाना या खराब हालत में रखना
गंदा पानी सीधे नालों और नदियों में छोड़ना
वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए फिल्टर, स्क्रबर आदि का अभाव
तय समय पर नवीनीकरण के लिए आवेदन न करना
उत्पादन क्षमता से अधिक उत्पादन करना
सबसे बड़ा सवाल — बिना NOC कैसे चल रहे हैं उद्योग?
कानून साफ कहता है कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत बिना NOC के कोई भी उद्योग नहीं चल सकता।
फिर भी, हरिद्वार के कई उद्योग NOC रद्द होने के बावजूद खुलेआम उत्पादन कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और निरीक्षण की कमी के कारण, NOC रद्द होने के बाद भी इन इकाइयों को बंद नहीं कराया जाता। कुछ उद्योग रात में या छुट्टियों में उत्पादन करके निरीक्षण टीम से बचते हैं।
बोर्ड और प्रशासन की जिम्मेदारी
बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, NOC रद्द होने के बाद नोटिस देकर जिला प्रशासन और पुलिस को सीलिंग या संचालन बंद कराने की कार्रवाई के लिए कहा जाता है।
लेकिन यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन और पुलिस के पाले में आने के बाद अक्सर देरी या लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
गंगा किनारे बसे गांवों और औद्योगिक क्षेत्रों के पास रहने वाले लोग कहते हैं कि प्रदूषण का असर उनके स्वास्थ्य और खेती दोनों पर पड़ रहा है।
“जब सरकार खुद मान रही है कि ये उद्योग नियम तोड़ रहे हैं, तो इन्हें बंद क्यों नहीं किया जाता? सिर्फ कागजों में कार्रवाई करने से प्रदूषण नहीं रुकेगा।”
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि उद्योगों को बंद करने के लिए सख्ती से निरीक्षण और बिजली-पानी की आपूर्ति रोकने जैसे कदम उठाने होंगे।
सिर्फ NOC निरस्त करने से प्रदूषण नियंत्रण संभव नहीं है, जब तक कि उसे लागू करने के लिए ज़मीन पर ठोस कार्रवाई न हो।
NOC रद्द होने के तुरंत बाद उद्योग की बिजली और पानी की आपूर्ति रोकना
संयुक्त निरीक्षण टीम बनाकर साप्ताहिक औचक जांच
ऑनलाइन पोर्टल पर NOC स्थिति के साथ संचालन की स्थिति भी दिखाना
नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देना
हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन नगरी के लिए स्वच्छ वातावरण बनाए रखना न केवल स्थानीय स्वास्थ्य, बल्कि गंगा की पवित्रता के लिए भी जरूरी है। बोर्ड द्वारा NOC रद्द करना एक सही कदम है, लेकिन NOC रद्द होने के बावजूद चल रहे उद्योग यह दिखाते हैं कि प्रशासनिक कार्रवाई अधूरी है। जब तक वास्तविक बंदी और सख्त अमल नहीं होगा, तब तक ये आंकड़े सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रहेंगे और प्रदूषण यूं ही बढ़ता रहेगा।